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जलप्रबंधन हो तो बिहार में बाढ़ बन जाएगी वरदान! Featured

Written by  Published in Others Thursday, 19 July 2012 06:16

पटना।। बिहार अपनी जल संपदा का सही प्रबंधन कर ले तो बाढ़ उसके लिए अभिशाप नहीं, वरदान बन जाएगी और इस जल संपदा से राज्य पचास लाख एकड़ जमीन की सिंचाई कर सकता है। एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन के साथ-साथ 90 लाख लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा सकता है। पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने रविवार को एनआइटी के तीसरे वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

डा. कलाम ने कहा कि यह सौभाग्य है कि बिहार में पानी की कमी नहीं है। लेकिन, कई बार यह इतना ज्यादा हो जाता है कि इसे संभालना मुश्किल हो जाता है। जरूरत है इसके सही प्रबंधन की।

दो बार सौंपी कार्ययोजना : डा.कलाम ने कहा कि मैंने गहन अध्ययन के बाद एक कार्ययोजना बनाई और इसे दो बार बिहार सरकार को सौंपी। इससे न केवल उत्तर बिहार की बाढ़ की समस्या का समाधान हो सकता है, बल्कि दक्षिण बिहार के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का भी भला होगा। यदि एनआइटी के शिक्षक-छात्र इस समस्या से प्रदेश को निजात दिलाने में जुटें तो सूबे के विकास में दूसरी कोई परेशानी नहीं रह जाएगी। यहां सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती बाढ़ का स्थायी समाधान है। बाढ़ समाधान व स्मार्ट वाटरवेज (जलपथ) निर्माण को तकनीकी ज्ञान की साझेदारी जरूरी है। इसके लिए बहुआयामी तकनीकी शोध और समेकित प्रयास करने होंगे। मैं, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) पटना के शिक्षकों-छात्रों को स्मार्ट वाटरवेज निर्माण की अहम जिम्मेदारी देता हूं। इसे आप चुनौती के रूप में लें।

सुझाए उपाय : कलाम ने विस्तार से उपाय सुझाए। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश को नहरों से जोड़कर पाच सौ किमी जल परिवहन की व्यवस्था की जा सकती है। जलपथ के उपयोग से रेलवे से दोगुना और पथ परिवहन से आठ गुना ज्यादा सुविधा लोगों को मिलेगी। ये जलपथ प्रदेश में एक अतिरिक्त जलाशय का काम भी काम करेंगे। जलपथ व नदियों के मध्य बांधों का भी निर्माण होना चाहिए। इसके अलावा क्यारी नुमा कुएं (एक के बाद एक परत में) भी बनाए जाने चाहिए।

पांच क्षेत्रों पर ध्यान जरूरी : उन्होंने कहा कि यदि हमें देश को विकसित राष्ट्र बनाना है तो हमें पांच क्षेत्रों में पूरी शक्ति से समेकित प्रयास करने होंगे। यदि हम कृषि को खाद्य प्रसंस्करण से, शिक्षा को स्वास्थ्य देखभाल, सूचना को संचार तकनीक, सतत विद्युत आपूर्ति को देशभर में भू-वायु व जल की सुगम परिवहन व्यवस्था और अपने विश्वास को जटिल तकनीकों से जोड़ दें, तो समन्वित विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

समारोह में आइआइटी मद्रास के पूर्व निदेशक व एआइसीटीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आर नटराजन, एनआइटी पटना शासी निकाय के अध्यक्ष मानस बिहारी वर्मा, निदेशक प्रो. अशोक डे, शिक्षक, सीनेट के सदस्य, कर्मचारी, छात्र-छात्रा व अभिभावक मौजूद थे।

Read 655 times Last modified on Friday, 18 October 2013 13:51

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