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तलवार परिवार रिहा, नो वन किल्ड आरुषि Featured

Written by  Published in Crime Thursday, 12 October 2017 10:38

नई दिल्ली।।आरुषि हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट को उसके मम्मी-पापा यानी डॉ. राजेश और नूपुर तलवार को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरुषि को तलवार दंपति ने नहीं मारा। साथ कोर्ट ने गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट के उस फैसले को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। आपको बता दें 26 नवंबर, 2013 को उनको सीबीआई कोर्ट ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तलवार दंपति ने सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। तलवार दंपति इस समय गाजियाबाद के डासना जेल में सजा काट रहे हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद एकबार फिर वहीं सवाल उठ खड़े हुए हैं कि आरुषि को किसने मारा ?

मई, 2008 में नोएडा के जलवायु विहार इलाके में 14 साल की आरषि का शव उसके मकान में बरामद हुआ था। शुरुआत में शक की सुई हेमराज की ओर गई, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से उसका भी शव बरामद किया गया। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।


23 मई 2015 को नोएडा पुलिस की जांच का हवाला देते हुए तत्कालीन आईजी गुरदर्शन सिंह ने कहा था कि डॉ. राजेश तलवार ने आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखने के बाद पहले हेमराज की और बाद में आरुषि की हत्या की। हालांकि, दबाव बढ़ने पर आईजी ने अपनी थिअरी को बदल दिया और कहा कि डॉ. तलवार ने अवैध संबंधों के विरोध पर पहले आरुषि को मारा और बाद में हेमराज को। दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने आरुषि की मां डॉ. नूपुर तलवार को साजिश में शामिल बताया था। 


नोएडा पुलिस की जांच पर सवाल उठे सवाल के बीच तत्कालीन मायावती सरकार ने 31 मई को केस सीबीआई को ट्रांसफर दर दिया। सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर अरुण कुमार सिंह की टीम ने डॉ. तलवार के डेंटल क्लिनिक पर काम कर चुके कृष्णा, तलवार के नजदीकी दुर्रानी दंपती के नौकर राजकुमार और पड़ोस में काम करने वाले विजय मंडल को हत्याकांड का आरोपी माना। 

इसके बाद केस की जांच सितंबर 2009 में सीबीआई की दूसरी टीम ने शुरू की। इस टीम ने तीनों नौकरों को क्लीन चिट दी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर तलवार दंपती को ही मुख्य आरोपी माना। सीबीआई ने दलील दी कि जोर जबरदस्ती किए जाने के कोई सबूत नहीं मिले। 


वारदात के बाद आरुषि के शव को ढकने, बिस्तर पर चादर को ठीक करने, प्राइवेट पार्ट्स को साफ करने और हेमराज की बॉडी को छिपाने का काम कोई बाहरी नहीं करेगा। हालांकि, इस टीम ने माना कि हेमराज का खून दंपती के कपड़ों पर नहीं मिला। वारदात के शामिल हथियार नहीं मिले। तलवार दंपती पर किए गए साइंटिफिक टेस्ट भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। वारदात में सीधे तौर पर तलवार दंपती के शामिल होने के कोई सबूत नहीं मिले, जिस पर क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई। 


16 मई 2008 की सुबह आरुषि (14) की लाश मिलने के बाद नोएडा पुलिस की ओर से नौकर हेमराज को हत्यारोपी बताया गया, अगले दिन उसकी लाश छत पर पड़ी मिली। करीब 7 दिन बाद 23 मई को आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार को गिरफ्तार किया गया। 31 मई को इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई। सितंबर 2009 में सीबीआई की दूसरी टीम को जांच दी गई। टीम ने तलवार दंपती को आरोपी बताते हुए साक्ष्य न होने पर क्लोजर रिपोर्ट लगाई। कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को ही चार्जशीट में तब्दील कर तलवार दंपती पर केस चलाने के आदेश दिए। 26 नवंबर 2013 को आरुषि के माता-पिता को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

 

 

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