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पुणे में पहले वनडे में शानदार जीत दर्ज कर टीम इंडिया ओडिशा के कटक में खेले जाने वाले दूसरे वनडे के लिए तैयार है| कटक में फैंस का जोश भी देखते ही बनता है, नोटबंदी के फैसले के बाद कटक में यह पहला क्रिकेट मैच होगा|

पुणे वनडे में शानदार शतकीय पारी खेलने के बाद लोगों में कप्तान विराट कोहली के लिए दीवानगी अभी से दिखाई दे रही है, पूरे राज्य से लोग गुरूवार को होने वाले मैच के लिए कटक पहुंच रहे हैं|

 

ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन भी इस मैच के लिए काफी उत्साहित दिख रहा है, इस मैच से पहले मैदान में भी कई बदलाव किए गए हैं इस बार मैदान में नया स्कोर बोर्ड भी दिखाई देगा| एसोसिएशन के सीईओ बिद्युत नायक ने कहा कि अभी तक 15,444 में से 12,714 टिकट बिक चुके हैं और बाकी टिकट भी मैच से पहले बिक जाने की संभावना हैं| उन्होंने कहा कि हमें 2000 गैलरी टिकट बिकने की भी पूरी उम्मीद है|

 

कालाहांडी से मैच देखने आए एक फैन ने कहा कि वह यहां पिछले दो दिनों से है, उसे बेहद ही मुश्किल से मैच का टिकट मिल पाया है और वह विराट कोहली की बैटिंग देखने का इंतजार कर रहे हैं, उनकी इच्छा है कि विराट कोहली छक्का लगाकर मैच को जिताएं|

विराट कोहली की महिला क्रिकेट फैंस में भी काफी पॉपुलैरिटी है, यही कारण है कि यहां पहुंचने वाले दर्शकों में महिला फैंस की भी काफी संख्या है| पूजा भगत ने कहा कि विराट कोहली की दीवानगी के कारण टिकट खरीदने वालों में लड़कियों की संख्या ज्यादा है, उन्होंने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि विराट धोनी से भी अच्छे कप्तान साबित होंगे|

 

टिकट खरीद में कैशलेस मुहीम का असर भी देखने को मिल रहा है, क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारी सत्या महांती ने बताया कि 2000 रुपये से अधिक के टिकट के लिए कैशलेस को जरुरी कर दिया गया है और हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि लोगों को कैशलेस में कोई दिक्कत ना आए|

पुणे में रविवार को इंग्लैंड के खिलाफ विराट कोहली ने मैच जिताऊ 122 रनों की पारी खेली. इसके साथ ही एक बार फिर विराट और सचिन के बीच तुलना शुरू हो गई है. लक्ष्य का पीछा करते हुए यह विराट की 17वीं सेंचुरी थी. उन्होंने रनों का पीछा करते हुए 17 शतक लगाने के सचिन के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली. सचिन ने जहां इतने शतक के लिए 232 पारियां खेलीं, वहीं विराट ने महज 96 पारियों में ही यह उपलब्धि हासिल कर ली. लेकिन विराट ने साफ कर दिया है कि सचिन के आंकड़ों तक पहुंचना बहुत मुश्किल होगा.

अधिक दोस्तों के करीब होने से भटकाव होता है

 

उन्होंने बीसीसीआई डॉट टीवी के लिए दिए इंटरव्यू में कहा- मैं भाग्यशाली हूं कि बहुत अधिक लोगों से मेरी नजदीकी नहीं है. मैं सोचता कि यह आपके लिए यह मददगार है. यदि आपके पास दोस्तों या फिर बात करने वाले लोगों की संख्या ज्यादा होती है, तो भटकाव होता है और टाइम मैनेजमेंट असंभव हो जाता है.

 

अपनी आकांक्षाओं को सीमित नहीं करना चाहिए

 

कोहली ने कहा- मैं इतना लंबा यानी 24 वर्ष तक न खेल पाऊं. निश्चित तौर पर 200 टेस्ट, 100 अंतरराष्ट्रीय शतक, ये लाजवाब आंकड़े हैं. इन तक पहुंच पाना लगभग असंभव है. लेकिन यह बात जरूर है कि मैं हमेशा से एक अंतर पैदा करना चाहता हूं. किसी को अपनी आकांक्षाओं को सीमित नहीं करना चाहिए. मेरा मानना है कि मैं खेल को एक बेहतर उपलब्धि के साथ छोड़ूं.

पाकिस्तान का ऑस्ट्रेलिया की धरती पर कंगारुओं के हाथों हारने का सिलसिला जारी है. 0-3 से टेस्ट सीरीज गंवाने के बाद पांच वनडे मैचों की सीरीज के पहले वनडे में उसे ऑस्ट्रेलिया ने 92 रन से मात दी. यानी तीनों फार्मेट की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई धरती पर पाकिस्तान की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह लगातार 16वीं हार है. पाकिस्तानी टीम को आखिरी जीत 2005 में वाका में खेले गये वनडे में मिली थी.

 

ऑस्ट्रेलिया की आधी टीम 78 रन पर लौट गयी थी

टास जीतकर पहले खेलने का कप्तान स्टीव स्मिथ का फैसला उस वक्त सही नहीं लग रहा था, जब कंगारुओं के पांच विकेट महज 78 रन पर ढेर हो गए थे. लेकिन विकेटकीपर बल्लेबाज मैथ्यू वेड के 100 गेंदों में नाबाद 100 रन और ग्लेन मैक्सवेल के अर्धशतक (60 रन) की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने 9 विकेट पर 268 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा कर लिया

 

आफरीदी की उम्मीदों पर फिरा पानी

जेम्स फाकनर (4 विकेट) तथा पैट कमिंस (3 विकेट) की तेजी के आगे पाकिस्तानी टीम की एक न चली. पूरी टीम 42.4 ओवर में 176 रन पर सिमट गयी. ऑस्ट्रेलिया को 268 रन पर रोकने के बाद पूर्व कप्तान शाहिद आफरीदी ने ट्वीट कर खुशी जताई थी कि यह स्कोर पाक टीम की पहुंच से बाहर नहीं रहेगी. लेकिन हुआ इसके उलट.

इंग्लैंड इलेवन के खिलाफ अभ्यास मैच में इंडिया ए को हार का सामना करना पड़ा है. इंग्लैंड ए ने 305 रनों का पीछा करते हुए तीन विकेट से जीत दर्ज की है. हालांकि टीम इंडिया की वनडे-टी 20 फॉर्मेट से कप्तानी छोड़ चुके महेंद्र सिंह धोनी पुराने रंग में लौट आए हैं. मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में भारत ए और इंग्लैंड इलेवन के बीच खेले जा रहे वॉर्म अप मैच में धोनी ने आखिरी ओवरों में कमाल की बैटिंग की.

68 रन पर नॉट आउट रहे. उन्होंने आखिरी ओवर में धमाकेदार बैटिंग करते हुए 23 रन बनाए. बता दें कि पहले से ही कहा जा रहा था कि धोनी कप्तानी छोड़ने के बाद अपने पुराने अंदाज में लौटेंगे. जब वे इंटरनेशनल क्रिकेट में आए थे तो उस वक्त वे अपने फिनिशिंग के लिए जाने जाते थे.

ऐसा रहा धोनी का फिनिश

इंग्लैंड इलेवन के खिलाफ आखिरी ओवर में धोनी ने खुलकर बैटिंग की. उस ओवर में 6 4 4 2 6 1 बटोरे. धोनी 45 रन पर बैटिंग कर रहे थे. इसके बाद उन्होंने छक्का मारकर अपनी फिफ्टी पूरी की. धोनी ने अपनी इनिंग में 8 चार मारे. 2 छक्के मारे. इंडिया ए की ओर से अंबाती रायडू ने शानदार शतक लगाया. साथ ही युवराज सिंह, एम एस धोनी और शिखर धवन ने अर्धशतकीय पारी खेली. इंडिया ए ने चार विकेट खोकर 304 रन बनाए थे. इंग्लैंड इलेवन ने लक्ष्य का पीछा करते हुए सात बॉल रहते अभ्यास मैच में जीत दर्ज की.

युवराज सिंह ने भी लगाई फिफ्टी

करीब 3 साल बाद वनडे में शामिल युवराज सिंह ने भी इस मैच में कमाल की बैटिंग की. पहले दिन युवराज ने भी फिफ्टी मारी. युवराज ने अपनी फिफ्टी 40 बॉल में पूरी की.

 

धोनी का पैर छूने मैदान पर पहुंच गया एक फैन

धोनी इस मैच में आखिरी बार टीम इंडिया की ओर से किसी भी फॉर्मेट की कप्तानी कर रहे हैं. सुबह टॉस भी उन्होंने किया. इसके बाद धोनी जब बैटिंग करने आए तो वहां दर्शक दीर्घा में बैठे प्रशंसकों ने तालियों के साथ स्वागत किया. बता दें कि स्टेडिम के दो स्टैंड पर दर्शकों को फ्री एंट्री दी गई है. हाल के दिनों में ऐसा पहली बार हुआ होगा कि अभ्यास मैच में दस हजार से ज्यादा लोग मैच देखने पहुंचे हों. लोग धोनी-धोनी की नारेबाजी कर रहे थे. इस बीच, मैच में उस वक्त बाधा पड़ गई जब एक फैन धोनी का पैर छूने मैदान पर पहुंच गया। इसे सुरक्षा में सेंध के तौर पर भी देखा जा रहा है.

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने अपने उस फैसले को बदल दिया है, जिसमें हाल ही में दागी सुरेश कलमाड़ी और अभय चौटाला को आईओए ने आजीवन अध्यक्ष बनाने की बात कही थी. हालांकि नियुक्ति के 24 घंटे के अंदर ही कलमाड़ी ने इस पद को स्वीकारने से इनकार कर दिया था.

आईओए के अध्यक्ष एन.रामचंद्रन ने कहा कि अभय चौटाला और सुरेश कलमाड़ी को आजीवन अध्यक्ष के रूप में ना चुने जाने का फैसला चेन्नई के सालाना आम बैठक में लिया गया है.

चौटाला का पत्ता कटा

इसके अलावा अभय सिंह चौटाला दिसंबर 2012 से फरवरी 2014 तक आईओए अध्यक्ष रहे हैं. उस समय इंटरनेशनल ओलंपिक समिति ने चुनावों में IOA को निलंबित कर दिया था क्योंकि उसने चुनावों में ऐसे उम्मीदवार उतारे थे जिनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल थे. IOA अध्यक्ष के रूप में उनके चुनाव को IOC ने रद्द कर दिया था. आईओए संविधान में संशोधन के बाद ही आईओसी ने फरवरी 2014 में निलंबन हटाया था.

नई दिल्ली(6 जनवरी): पाकिस्तानी बल्लेबाज यूनुस खान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी टेस्ट मैच के तीसरे दिन अपने टेस्ट करियर की 34वीं सेंचुरी पूरी की। इस सेंचुरी से उनके नाम के साथ एक और अनोखा रिकॉर्ड जुड़ गया।

 

- यूनुस दुनिया के पहले ऐसे क्रिकेटर बन गए हैं, जिन्होंने कुल 11 देशों में सेंचुरी बनाई है।

 

- 10 टेस्ट प्लेइंग नेशन के खिलाफ उनकी ही सरजमीं पर सेंचुरी ठोकने के अलावा खान ने UAE (न्यूट्रल वेन्यू) में भी सेंचुरी बनाई है।

 

- इससे पहले 10 मुल्कों में सेंचुरी जड़ने का रिकॉर्ड वह भारत के राहुल द्रविड़ के साथ साझा कर रहे थे।

 

- अपनी 34वीं टेस्ट सेंचुरी के साथ ही यूनुस खान सुनील गावसकर, ब्रायन लारा और महेला जयवर्धने जैसे दिग्गजों की बराबरी करने में भी कामयाब रहे।

भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे कामयाब कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने वनडे और टी-20 की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है. हालांकि धोनी वनडे और टी-20 मैच खेलते रहेंगे. धोनी इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली वनडे और टी-20 मैचों में चयन के लिए भी उपलब्ध रहेंगे. आपको बता दें कि धोनी टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले चुके हैं.

बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जौहरी ने एक बयान में कहा है, 'सभी क्रिकेट प्रशंसकों और बीसीसीआई की तरफ से मैं महेंद्र सिंह धोनी का भारतीय क्रिकेट को दिए उनके शानदार योगदान के लिए शुक्रिया अदा करता हूं. उनकी कप्तानी में भारत ने क्रिकेट में नई ऊंचाईयों को छुआ.'

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार धोनी ने कहा है कि अगले टी-20 और वनडे वर्ल्ड कप में एक ही कप्तान हो, इसलिए अभी अलग हो गया. ताकि बोर्ड जल्द से जल्द नया कप्तान बना दे. अगर मैं नहीं हटता तो मामला अटका रहता.

 

महेंद्र सिंह धोनी ने भारत की ओर से 199 मैचों में कप्तानी की है जिसमें उन्होंने 110 मैचों में जीत हासिल की, जबकि 74 मुकाबलों में उन्हें हार मिली. चार मुकाबले टाई और 11 मैचों का कोई परिणाम नहीं निकला. धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने 60 फीसद से ज्यादा मैचों में जीत दर्ज की है. धोनी की कप्तानी में ही भारत ने दूसरी बार विश्व कप पर कब्जा किया. साथ ही धोनी टीम इंडिया को पहला टी-20 विश्व कप जिताने वाले कप्तान भी हैं.

 

कपिल देव ने धोनी को बहुत सफल कप्तान बताते हुए कहा कि धोनी की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. उन्होंने कहा कि ये उनका निजी फैसला है और उन्होंने युवा खिलाड़ियों को मौका देने के लिए ये कदम उठाया होगा.

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने ट्वीट कर धोनी को उनकी शानदार कप्तानी के लिए बधाई दी और कहा कि एमएस धोनी के इस फैसले का सम्मान होना चाहिए.

महेंद्र सिंह धोनी के कप्तानी छोड़ने के निर्णय पर पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने कोई हैरानी नहीं जताई, हालांकि गांगुली के मुताबिक धोनी अभी भी फिट हैं और वे 2019 का वर्ल्ड कप खेल सकते हैं. गांगुली ने कहा कि बतौर कप्तान धोनी ने लगभग सभी टूर्नामेंट जीते हैं और वे एक उम्दा कप्तान रहे हैं.

केरल क्रिकेट संघ (केसीए) के अध्यक्ष टी. सी. मैथ्यू के नेतृत्व में सोमवार को केसीए के सभी अधिकारियों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित लोढ़ा समिति की सिफारिशों को केसीए में लागू करने के मकसद से केसीए के अधिकारियों ने अपने-अपने इस्तीफे दिए.

मैथ्यू का इस्तीफा

मैथ्यू ने कहा कि वह सभी इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं ताकि केसीए में लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू की जा सकें. मैथ्यू ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार मैं और वह सभी अधिकारी, जिन्होंने नौ साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है, इस्तीफा दे रहे हैं. हमने तय किया है कि केसीए के वरिष्ठतम सदस्य बी. विनोद संघ के नए अध्यक्ष और जयेश जॉर्ज नए सचिव होंगे.'

 

मैथ्यू की मैराथन पारी समाप्त

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को लोढ़ा समिति की अनुशंसाओं को लागू करने के संबंध में अड़ियल रुख अपनाए हुए देश के शीर्ष क्रिकेट संघ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को उनके पदों से हटा दिया. मैथ्यू 2015 में बीसीसीआई द्वारा चुने गए पांच उपाध्यक्षों में से एक थे. वह पश्चिम जोन से आते हैं और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के खास माने जाते हैं. पेशे से वकील मैथ्यू 1997 से 2005 तक केसीए के कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं. वह इसके बाद 2014 तक केसीए के सचिव और उसके बाद अध्यक्ष बने.

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें न मानने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को उनके पद से हटा दिया. ऐसे में हर किसी कि नजरें इस बात पर टिकी हैं कि, बीसीसीआई का मूल ढांचा कैसा होगा और वो कौन से अधिकारी और क्रिकेटर होंगे जो आने वाले दिनों में बीसीसीआई को चलाएंगे. इस पर माथा-पच्ची शुरू हो गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने गोपाल सुब्रमण्यम और वरिष्ठ वकील अनिल दीवान को ऑबजर्वर नियुक्त किया है. जो लोढ़ा कमेटी के साथ मिलकर बीसीसीआई के अधिकारियों का चयन करेंगे. इसमें पूर्व क्रिकेटरों के साथ-साथ कुछ ब्यूरोक्रेट्स को शामिल किये जाने की संभावना है. 25 पन्नों के ऑर्डर में ये साफ लिखा गया है कि जज ऑबजर्वर की भूमिका में ही रहेंगे. शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 जनवरी की तारीख निर्धारित की है. इसी दिन बीसीसीआई के अंतरिम बोर्ड की घोषणा होगी. न्यायालय ने कहा कि वह उसी दिन प्रशासक की नियुक्ति का आदेश भी जारी करेगा.

 

क्या होगा अगला कदम?

अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के को हटाए जाने के बाद कोर्ट का अगला कदम क्या होगा. क्या बीसीसीआई के सभी पुराने अधिकारियों को हटा दिया जाएगा. क्योंकि पुराने अधिकारियों को इस बात का खतरा होगा जो ठाकुर और शिर्के के साथ हुआ वो उनके साथ भी हो सकता है. कोर्ट के इस ऑर्डर का असर स्टेट क्रिकेट एसोशियन पर पड़ना शुरू हो गया है. ऐसे में बीसीसीआई का आने वाले दिनों में क्या स्वरूप होगा ये देखना बेहद दिलचस्प रहेगा.

भ्रष्टाचार और अपराध के कई आरोपों से घिरे सुरेश कलमाड़ी और अभय चौटाला को भारतीय ओलंपिक संघ ने अपना आजीवन सदस्य बनाया. दोनों राजनेताओं का लंबे अंतराल तक भारतीय खेल की दुनिया में दखल रहा और इस दौरान इन पर गंभीर आपराधिक आरोप लगे.

दोनों को खेल प्रबंधन समिति से हटाया गया. आईओए के इस फैसले पर खेल मंत्रालय ने हैरानी जताई और खेल मंत्री ने अपने घर पर ही संवाददाता सम्मेलन बुला कर इसकी आलोचना और इस पर जांच बैठाने का निर्णय लिया. हालांकि इस फैसले के 24 घंटे के भीतर ही कलमाड़ी ने खुद इस पद को लेने में असमर्थता जता दी लेकिन अभय चौटाला ने अब तक इस पद को ठुकराने का मन नहीं बनाया है.

इस साल रियो ओलंपिक में महिला तिकड़ी पीवी सिंधू, साक्षी मलिक और दीपा कर्माकर के प्रदर्शन से जहां क्रिकेट से इतर खेल जगत को कुछ साकारात्मक संकेत मिले वहीं इस हैरान कर देने वाले फैसले ने साल के अंत में एक बार निराशा के बादल बिखेर दिए. भारतीय ओलंपिक संघ का यह अभूतपूर्व फैसला एक सही के बाद दस गलत कदम उठाने जैसा है जिससे बचने की जरूरत थी.

 

क्या है कलमाड़ी का खेलों से नाता?

1996 से 2011 तक भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष रह चुके सुरेश कलमाड़ी नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों (2010) की आयोजन समिति के भी प्रमुख थे. राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन को लेकर बड़े स्तर पर आर्थिक अनियमितता के बाद कलमाड़ी पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगे. उन्हें हटना पड़ा. जेल हुई तो तीन बार के सांसद कलमाड़ी को कांग्रेस पार्टी ने भी बर्खास्त कर दिया. 10 महीने जेल में रहने के बाद कलमाड़ी को जमानत पर रिहा किया गया. ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान ही कलमाड़ी 2000 से 2013 तक एशियन एथलेटिक्स महासंघ के भी अध्यक्ष रहे और पिछले साल मार्च में ही उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान एशिया में एथलेटिक्स के विकास में योगदान के लिए इसका आजीवन मानद अध्यक्ष बना दिया.

 

अभय चौटाला का क्या है खेल परिचय?

चौटाला का भी आईओए में पुराना कार्यकाल विवादों भरा रहा था. अभय चौटाला आय से अधिक संपत्ति के मामले में अभियुक्त हैं. चौटाला भारतीय एमेच्योर मुक्केबाजी महासंघ के भी अध्यक्ष रह चुके हैं जिसकी मान्यता 2013 में रद्द कर दी गई थी. चौटाला दिसंबर 2012 से फरवरी 2012 तक आईओए के अध्यक्ष थे और उनके कार्यकाल के दौरान ही अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने चुनाव में गड़बड़ी को लेकर भारतीय ओलंपिक संघ को निलंबित किया था. यह निलंबन तब तक जारी रहा जब तक चौटाला और कलमाड़ी को प्रबंधन से हटाया नहीं गया.

 

मानद अध्यक्ष बना झुनझुना पकड़ाया

यहां यह बताना जरूरी है कि मानद अध्यक्ष के पास करने को कुछ खास नहीं होता क्योंकि आर्थिक एवं प्रशानसनिक शक्तियां अध्यक्ष एन रामचंद्रन के अधिकार दायरे में आती हैं. यानी एक तरह से इन दोनों को एक झुनझुना भर पकड़ाया गया जो संघ की पूर्व अध्यक्षों को मानद अध्यक्ष बनाने की परंपरा के तहत है. साथ ही मानद अध्यक्ष को न तो कोई ऑफिस और न ही कोई अधिकार दिया जाता है जिससे दैनिक कार्यों में वो हस्तक्षेप कर सकें. भारतीय ओलंपिक संघ की कार्यकारी समिति में अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, आठ वरिष्ठ उपाध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष, छह संयुक्त सचिव, कार्यकारी परिषद के 10 सदस्य, एथलीट आयोग का एक चयनित प्रतिनिधि रहता है. ये ही संघ को चलाते हैं. मानद अध्यक्षों को सालाना आम बैठक में बुलाया जा सकता है लेकिन इन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता.

 

आनन फानन में इस निर्णय पर खेल मंत्री का मुंह खोलना आने वाले दिनों में स्वायत्त काम कर रहे इन खेल संघों के लंबे समय से अपरिवर्तित प्रबंधन नियमों को बदले जाने की संभावना की और इशारा जरूर कर रहा है. हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि बिल्ली के गले में घंटा बांधने की कवायद कब शुरू होगी.

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एडिटर ओपेनियन

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