You are here: Homeस्वास्थ्य

नई दिल्ली (23 अगस्त): अब वर्तमान समय में दिनोंदिन नयी नई टेक्नोलॉजी आ रही है अभी वर्तमान समय में एक टेक्नोलॉजी स्वास्थ्य को लेकर आई है। शोधकर्ताओं ने मकड़ी के जाले से दिल की मांसपेशीय टिशू बनाए हैं। इन टिशू का निर्माण यह जांच करने के लिए किया गया है कि 'कृत्रिम रेशम प्रोटीन' हृदय के टिशू के निर्माण के लिए उपयुक्त हो सकते है या नहीं। इस्केमिक बीमारियों- जैसे कार्डियक इन्फ्रेक्शन से हृदय की मांसपेशीय कोशिकाओं की स्थायी हानि का कारण बनती है। इसकी वजह से

दिल की कार्यक्षमता कम हो जाती है, जिसका दिल के कार्य पर असर पड़ता है। वहीँ जर्मनी के इरलगेन-नर्नबर्ग (एफएयू) स्थित फ्रेडरिक एलेक्जेंडर विश्वविद्यालय के शोधकतार्ओं के अनुसार, रेशम कृत्रिम दिल के टिशू बनाने में कारगर हो सकता है। रेशम की संरचना व यांत्रिक स्थिरता देने का कार्य फाइब्रोनिन प्रोटीन करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह टेक्नोलॉजी’ बहुत कारगार साबित होगी जो की दिल के मरीजों के लिए काफी मदगार साबित होगी

 

नई दिल्ली(10 अप्रैल): विश्व में वर्ष 2015 में मरने वाले प्रत्येक 10 लोगों में से एक से अधिक की मौत धूम्रपान की वजह से हुई और इनमें से 50 फीसदी से अधिक मौत सिर्फ चार देशों में हुई है, जिसमें भारत भी शामिल है। एक नए अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है।

- चिकित्सकीय पत्रिका 'द लैनसेट' में प्रकाशित ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) के अध्ययन के अनुसार वर्ष 2015 में विश्व में हुई 64 लाख लोगों की मौत में 11 फीसदी से अधिक लोगों की मौत का कारण धम्रूपान था और इनमें से 52।2 फीसदी लोगों की मौत चीन, भारत, अमेरिका और रूस में हुई।

- पुरषों के धूम्रपान करने के मामले में चीन, भारत और इंडोनेशिया तीन अग्रणी देश हैं।

- वर्ष 2015 में विश्व में धूम्रपान करने वाले पुरूषों में से करीब 51।4 फीसदी लोग इन्हीं देशों के हैं। विश्व में धूम्रपान करने वाली कुल आबादी का 11।2 फीसदी हिस्सा भारत में रहता है।

- अध्ययन के अनुसार वर्ष 2005 की तुलना में वर्ष 2015 में धूम्रपान से होने वाली मौत में 4।7 फीसदी की वृद्धि हुई है। धूम्रपान का स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है और यह अक्षमता का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है। इससे पहले यह अक्षमता का तीसरा सबसे बड़ा कारण था।

- अध्ययन में बताया गया, वर्ष 2015 में विश्व में होने वाली मौत में से 11।5 फीसदी मौत का कारण धूम्रपान था जिसमें से 52।2 फीसदी लोगों की मौत चार देशों- चीन, भारत, अमेरिका और रूस में हुईं। यह अध्ययन 195 देशों में धूम्रपान करने की आदतों पर आधारित है।

- इसमें बताया गया, महिलाओं द्वारा धूम्रपान करने के मामले में तीन अग्रणी देश अमेरिका, चीन और भारत हैं। यहां विश्व में धूम्रपान करने वाली महिलाओं की 27।3 फीसदी आबादी रहती है

 

अक्सर एसिडिटी होने पर लोग एंटासिड या एसिडिटी की महंगी दवाओं की तरफ भागते हैं। एम्स भोपाल के आयुष विभाग के डॉ. अजय सिंह बघेलका कहना है कि एसिडिटी का असली कारण खान-पान की गलत आदतें है। अगर इन आदतों में बदलाव लाया जाए तो एसिडिटी से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है। आइए जानते हैं कौन सी वह 8 आदतें हैं जिनमें बदलाव लाकर एसिडिटी से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है।

 

बदलाव 1 – खाने के बीच में 3-4 घंटे से ज्यादा का गैप न करे

 

 

कारण – खाना पचने में 3-4 घंटे लगते है उसके बाद पेट में अपने आप एसिड बनना शुरू हो जाता है

 

बदलाव 2 – रोज निर्धारित समय पर ही खाए

 

कारण – ब्रेन और पेट की मेमोरी में खाने का समय दर्ज रहता है, समय होने पर बॉडी से डाइजेस्टव एसिड रिलीज होने लगते है

 

बदलाव 3 – खाना धीरे – धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाए

 

कारण – खाना अच्छे से न चबाने से खाने के बड़े टुकड़े डाइजेस्ट करने के लिए पेट ज्यादा एसिड रिलीज करता है

 

बदलाव 4 – अपनी फूड हेबिट में बदलाव करे

 

क्या करे – स्पाइसी, ऑयली, फ़ास्ट फूड के बजाय ज्यादा फाइबर, नट्स, हरी सब्जियां, बीन्स वगेरा खाए

 

बदलाव 5 – अल्कलाइन फूड्स की मात्रा बढाए

 

कारण – अल्कलाइन फूड एसिडिटी को न्यूट्रल करते है सोडे वाला नींबू पानी, सलाद, गाजर, खीरा खाए. पानी ज्यादा पिए

 

बदलाव 6 – एंटीबायोटिक्स या गर्म दवाओ का सेवन कम करके आयुर्वेद या होम्योपैथिक दवा ले

 

कारण – कई दवाओ के साइड इफ़ेक्ट से एसिडिटी हो सकती है.

 

बदलाव 7 – सोने से 3-4 घंटे पहले डिनर कर ले.

 

कारण – सोते समय डाइजेशन की प्रोसेस स्लो हो जाती है. खाना खाकर तुरंत सोने से एसिडिटी की प्रॉब्लम बढती है

 

बदलाव 8 – वॉक, एक्सरसाइज या योग करे.

 

कारण – फिजिकल एक्टिविटी न होने से डाइजेशन प्रॉपर नहीं होता और एसिडिटी बढ़ जाती है. रोज आधे घंटे की वॉक या एक्सरसाइज जरुरी है

 

आगे जानिए एसिडिटी से राहत की होम रेमेडी >>

 

लौंग – लौंग चबाएं या लौंग उबालकर उसका पानी पिए. ये गैस और एसिडिटी से राहत दिलाती है.

 

ठंडा दूध – ठंडा दूध पेट में जाकर एसिड को न्यूट्रीलाइट करता है. पेट को ठंडक पहुचाता है.

 

नींबू, खाने का सोडा – एक गिलास ठन्डे पानी में एक चमच नींबू का रस घोले और उसमे आधा चम्मच बेकिंग सोडा डालकर तुरंत पी लें.

 

केला – केले की अल्कलाइनप्रॉपर्टी पेट के एसिड को न्यूट्रीलाइट करती है ओर एसिडिटी और खट्टी डकार से राहत दिलाती है

 

अदरक – जलन होने पर एक टुकड़ा अदरक चबाएं, एक चम्मच शहद में अदरक का रस मिलाकर भी ले सकते है.

Contact Us

About Us

Udyog Vihar Newspaper is one of the renowned media house in print and web media. It has earned appreciation from various eminent media personalities and readers. ‘Udyog Vihar’ is founded by Mr. Satendra Singh.