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Religion (10)

 

 

तरूण चतुर्वेदी। नि:संदेह चित्रकूट भौतिक दृष्टि से कभी समृद्ध नही रहा हैं, इस की चिंता का विषय भी आर्थिक सम्पन्नता कभी नही था। लेकिन  आध्यात्मिक, और धार्मिक सम्पन्नता के लिए ये भूमि न सिर्फ़ भारत मे बल्कि संपूर्ण विश्व मे विख्यात हैं , क्यों कि इस मिट्टी में त्याग हैं, शांति हैं और आध्यात्म के लिए ये जगह माकूल भी है। तब तो हर रोज यहा यात्री आते है देश और विदेश से  कुछ तो बात है जो खाश है  नेत्र हीनो को आँख और दिवंगो को योग्य बना कर सतगुरु सेवा संघ और दिव्यांग वि.वि. ने साबित कर दिया है की ये सेवा और विद्या की भूमि भी है ।

 यही क्रम ग्रामोदय विश्व वि.वि. का है जो गाँव के उदय के लिए दीप जला रहा है 1992 से , सतगुरु आई हास्पिटल में हर साल 1 लाख लोगों के ऑख का अपरेसन किया जाता है, तब वे बेचारे उजेली दुनिया का उजेला देख पाते है। इन संस्थानो कि स्थापना करने वाले रणछोण दास जी महाराज, नानाजी देश मुख, जगत गुरु राम भद्राचार्य जी है । जिन्होने ये सबित कर दिया की ये पीडित मौनवता की सेवा की भूमि भी है । चित्रकूट के वैभव शाली राज में कुन्दन क्रीड़ा में उछलते साहस , ओज, पराक्रम की उस गाथा का प्रतीक हैं जिस के लिए कोल, भील , किरात , और बानरों के संघ से भागवान राम ने असुरी सत्ता को चुनौवती देदी । कोल , भीलों का स्नेह पाकर भागवान राम आयोध्या का प्यार तक भूल बैठे थे। दस हजार विधार्थीयों का पालन करने वाले कुलपति अत्रि संख्या योग के प्रणेता महर्षी कपिल, माता मंदाकिनी को उतपन्न करने वाली माता अनुसुइया देवा सुर संग्राम के योध्या राजऋषि मुचुकुन्द की गौरव शाली थाथी वाला चित्रकूट आज भी भयाक्रांत मानवता को त्राण दे सकता है। भारत वर्ष के संस्कृतिक गौरव का केन्द् रहा चित्रकूट काल का अतिक्रमण करते हुए प्रत्येक काल में आदर का   पात्र रहा है। विभिन्न काव्य, पुराणों, रामायण में चित्रकूट को चित्रकूट विषय के रुप में सामिल किया है । चित्रकूट आदिमानव का आवास भी रहा है तीस हजार पूर्व रामायण काल के शिला में बनी उकरी हुई रचनाए , तस्वीरे , निर्मित कला कृतिया इसका साबूत देती है। जो करीब 200 गुफाओ में स्थित है, इस लिए इसका नाम चित्रकूट पडा इतिहास के अनुशार धर्म के अनुशार इसकी परिभाषा कुछ अलग तरह से दी गई है ऱाजा कसु इस राज्य का पहला शाशक था जबकि शुंगकाल में यहा का शासन पुष्यमित्र के पुत्र अग्नि मित्र के द़वरा संचालित था।

   फिर मध्य काल में सन 1668 के करीब छत्रसाल ने मुगल सेना अब्दुल हमीद को मंदाकिनी के पश्चिमी तट पर पराजित किया ।

और वही कामदगिरी की परिक्रमा का निर्माण कर वाए थे। जबकि उनके वंशज पन्ना नरेश सभासिंह और अमान सिंह ने चित्रकूट में अनेक मन्दिर बनवाए है कुछ राम घाट में है तो कुछ परिक्रमा मार्ग में है

 ये आज  भी राजसी ठाठ की गवाही दे रहे है

 

 

कांची मठ के 69वें प्रमुख शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का बुधवार को तमिलनाडु के कांचीपुरम में देहावसान हो गया। कांची कोमकोटि पीठ के प्रमुख जयेंद्र सरस्वती स्वामिगल 82 वर्ष के थे।

उन्हें सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। पिछले साल से ही उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था।

कई स्कूलों, नेत्र चिकित्सालयों तथा अस्पतालों का संचालन करने वाले कांची कामकोटि पीठ की स्थापना पांचवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी, तथा जयेंद्र सरस्वती इसी के मौजूदा प्रमुख थे। उन्हें 22 मार्च, 1954 को श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामिगल का उत्तराधिकारी घोषित कर श्री जयेंद्र सरस्वती की उपाधि दी गई थी।

जयेंद्र सरस्वती पर वर्ष 2004 में कांचीपुरम मंदिर के एक कर्मचारी की हत्या के मामले में आरोपित किया गया था, लेकिन नौ साल बाद उन्हें तथा अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया गया था।

नई दिल्ली (14 अगस्त): कृष्ण कन्हैया का जन्मदिन यानी जन्माष्टमी आज है या कल इस पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि वे 14 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएं या 15 अगस्‍त को। दरअसल कृष्‍णा का जन्म भादप्रद माह कृष्‍ण पक्ष की अष्टमी को मध्य रात्रि के रोहिणी नक्षत्र में वृष के चंद्रमा में हुआ था। इस बार 14 अगस्‍त्‍ा की शाम 7.48 बजे अष्टमी तिथि लग जाएगी, जो मंगलवार शाम 5.42 बजे तक रहेगी। ऐसे में लोग जन्माष्टमी को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।

शास्त्रों के जानकारों के मुताबिक गृहस्थों को उस दिन व्रत रखना चाहिए जिस रात अष्टमी तिथि लग रही हो। इसके अनुसार 14 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रख सकते हैं। जो लोग वैष्णव और साधु संत हैं वह 15 अगस्त को अष्टमी तिथि में व्रत रख सकते हैं।

नई दिल्ली (14 अगस्त): जन्माष्टमी को लेकर देशभर में कृष्ण कन्हैया के भक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। तमाम मंदिरों को सजाया जा रहा है। लोग अपने-अपने तरह के भगवान कृष्ण की अराधना में जुटे हैं। भादो मास के कृष्ण पक्ष में जन्में श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं। उनकी आराधना धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाली है।

बताया जाता है कि राशि के अनुसार पूरे विधि-विधान से जन्माष्टमी के दिन नंदगोपाल की पूजा करने से आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त कर सकते हैं। जानते हैं कि किस राशि के जातक को जन्माष्टमी के दिन कौन सा विशेष उपाय करना चाहिए।

मेष- इस राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप को लडडुओं का भोग लगाएं

वृषभ- वृषभ राशि वालों को सुख-शांति पाने के लिए भगवान को नारियल की बर्फी का भोग लगाना चाहिए

मिथुन- काजू या इससे बनी मिठाई का भोग लगाएं

कर्क- कर्क राशि के जातक राधा-कृष्ण को खोए अथवा नारियल की बर्फी का भोग लगाएं

सिंह- सिंह राशि के जातक अपने कॅरियर, प्रेम व दांपत्य में सफलता पाने के लिए भगवान श्री कृष्ण को गुड़ का भोग लगाएं

कन्या- तुलसी के पत्ते अथवा हरे फल का भोग लगाना आपको मानसिक सुख व शांति प्रदान करेगा

तुला- श्री कृष्ण के बाल-गोपाल रूप को गाय के दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं

वृश्रिक- गुड का भोग लगाना आपको कॅरयिर में एच्छिक सफलता प्रदान करेगा

धनु- धनु राशि के जातकों को अपने बिगड़े कार्य संवारने या कर्ज के बोझ से मुक्ति पाने के लिए बेसन से बनी मिठाई का भोग भगवान को लगाना चाहिए

मकर- स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से उबरने के लिए एवं संतान-सुख के लिए आप श्रीकृष्ण को गुलाबजामुन से भोग लगाएं

कुंभ और मीन- कुंभ राशि वाले बर्फी एवं मीन राशि के जातक जलेबी का भोग लगाएं

नई दिल्ली (5 अप्रैल): ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी मीटिंग में तीन तलाक का जमकर विरोध हुआ। मीटिंग में शामिल बोर्ड के पदाधिकारियों और सदस्यों ने एक स्वर से मांग रखी कि तीन तलाक की कुप्रथा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार सती प्रथा जैसा सख्त कानून बनाए। इस तरह का कानून बनने से हजारों विवाहित महिलाओं का जीवन बर्बाद होने से बच जाएगा।

 

मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने दी। उन्होंने बताया कि मीटिंग में फैसला किया गया कि भारत में गौ मांस खाना और गो हत्या करना हराम है। बोर्ड प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि इस्लाम औरतों को मर्द के बराबरी का दर्जा देता है, तो फिर यह तीन तलाक कहां से आया। हम केंद्र सरकार से मांग करने जा रहे हैं कि तलाक को लेकर ऐसा सख्त कानून बने कि बच्चियों का जीवन खराब न हो।

 

शिया पर्सलन लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी मीटिंग में गो हत्या के मुद्दे पर चर्चा हुई। मीटिंग में इराक के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू आयतउल्लाह बशीर नजफी के फतवे का जिक्र किया गया। फतवे में मौलाना नजफी ने भारत में गो हत्या को हराम कहा है। कार्यकारिणी सदस्यों ने मौलाना बशीर नजफी के फतवे की सराहना की और कहा कि हिन्दुस्तान में गो हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध ठीक है। बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा मीटिंग में तय किया गया है कि गो मांस खाना और गो हत्या हराम है।

नई दिल्ली (5 अप्रैल): ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी मीटिंग में तीन तलाक का जमकर विरोध हुआ। मीटिंग में शामिल बोर्ड के पदाधिकारियों और सदस्यों ने एक स्वर से मांग रखी कि तीन तलाक की कुप्रथा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार सती प्रथा जैसा सख्त कानून बनाए। इस तरह का कानून बनने से हजारों विवाहित महिलाओं का जीवन बर्बाद होने से बच जाएगा।

 

मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने दी। उन्होंने बताया कि मीटिंग में फैसला किया गया कि भारत में गौ मांस खाना और गो हत्या करना हराम है। बोर्ड प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि इस्लाम औरतों को मर्द के बराबरी का दर्जा देता है, तो फिर यह तीन तलाक कहां से आया। हम केंद्र सरकार से मांग करने जा रहे हैं कि तलाक को लेकर ऐसा सख्त कानून बने कि बच्चियों का जीवन खराब न हो।

 

शिया पर्सलन लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी मीटिंग में गो हत्या के मुद्दे पर चर्चा हुई। मीटिंग में इराक के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू आयतउल्लाह बशीर नजफी के फतवे का जिक्र किया गया। फतवे में मौलाना नजफी ने भारत में गो हत्या को हराम कहा है। कार्यकारिणी सदस्यों ने मौलाना बशीर नजफी के फतवे की सराहना की और कहा कि हिन्दुस्तान में गो हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध ठीक है। बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा मीटिंग में तय किया गया है कि गो मांस खाना और गो हत्या हराम है।

नई दिल्ली (1अप्रैल): उत्तर प्रदेश सरकार ने जहां मानसरोवर यात्रा के लिए एक लाख रुपये की सहायता राशि का ऐलान किया है वहीं अब जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में स्थित वैष्णो देवी मंदिर के लिए हेलीकॉप्टर सेवा के किराये को कम कर दिया गया है।

मंदिर का संचालन करने वाले बोर्ड ने हेलीकॉप्टर के किराये को कम करने का फैसला किया है। हेलीकॉप्टर से प्रति यात्री कटरा और सांझीछत के बीच का किराया 1077 रुपये  होगा जबकि मौजूदा किराया प्रति यात्री के लिए 1170 रुपये  है। किराये की नई दरें आज से लागू हो गयीं हैं।

माता वैष्णो देवी मंदिर बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजीत कुमार साहू ने कहा कि मंदिर बोर्ड ने माता वैष्णो देवी के गुफा मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कटरा-सांझीछत-कटरा सेक्टर के लिए हेलीकॉप्टर किराये को एक अप्रैल से कम करने का फैसला लिया है।

 मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सेवा देने की कोशिश के हिस्से के तौर पर बोर्ड ने हेलीकॉप्टर किराये को कम करने सहित कई पहले की हैं।

नई दिल्ली (6 मार्च): ये तो सभी लोग जानते हैं कि रावण ने श्रीराम की पत्नी सीता माता का अपहरण किया था। लेकिन इस बारे में शायद ही किसी को पता होगा कि रावण ने भगवान राम की माता कौशल्या का भी अपहरण किया था।

 

जी हां, ये बात एकदम सत्य है और इस कथा का वर्णन आनन्द रामायण में मिलता है। आपको बता दें कि रावण चाहता तो कौशल्या माता को कभी नहीं छोड़ता, लेकिन ब्रह्मा जी की एक बात के कारण उसे कौशल्या को छोड़ना पड़ा।

नई दिल्ली (6 मार्च): ये तो सभी लोग जानते हैं कि रावण ने श्रीराम की पत्नी सीता माता का अपहरण किया था। लेकिन इस बारे में शायद ही किसी को पता होगा कि रावण ने भगवान राम की माता कौशल्या का भी अपहरण किया था।

 

जी हां, ये बात एकदम सत्य है और इस कथा का वर्णन आनन्द रामायण में मिलता है। आपको बता दें कि रावण चाहता तो कौशल्या माता को कभी नहीं छोड़ता, लेकिन ब्रह्मा जी की एक बात के कारण उसे कौशल्या को छोड़ना पड़ा।

 

 

नवरात्र आज से शुरू हो गए हैं। इस मौके पर पीएम मोदी ने देशवासियों को बधाई दी है। बता दें पीएम मोदी खुद नौ दिन नवरात्र का व्रत रखते हैं। वह इस दौरान सिर्फ पानी पीते हैं। पीएम मोदी नवरात्रि में नौ दिन व्रत रखते हैं और उन्होंने पहली बार इसकी जानकारी 2012 में दी जब वो गुजरात के सीएम थे। उन्होंने अपने ब्लॉग में बताया था कि वो बीते 35 वर्षों से यह व्रत रखते आ रहे हैं। मोदी के मुताबिक वो आत्मं-शुद्धिकरण के लिए यह व्रत रखते हैं।

उनके मुताबिक इस व्रत से उन्हें शक्ति मिलती है और साथ ही वह हर रात को मां दुर्गा से संवाद करने में समर्थ हो पाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का नवरात्रि से गहरा रिश्ता है। वह नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी मां का व्रत रखते हैं। बीते अप्रैल में नवरात्रि के पहले दिन पीएम मोदी ने असम की मशहूर कामाख्या माता का पूजन कर अपने व्रत की शुरुआत की थी। उन्होंने शक्तिपीठ के दर्शन भी किए। इसके बाद ही प्रधानमंत्री ने असम में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान की शुरुआत भी की। उस चुनाव में पहली बार असम में भगवा लहराया था और भाजपा पहली बार अपनी सररकार बनाने में सफल रही थी।

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